सच बोलने वालों को बावला करार दिया जाता है...
कभी उन्हें फांसी कभी पागलखाना दिया जाता है..
अब सच बोलने से क्यूँ डरते हैं हम..?
क्यूंकि पागलखाने से डरते हैं हम...
बोल सच बोलेगा?
मुँह गर खोलेगा...
बिना टिकेट आगरा की सैर करवाएंगे..
बंद कर तहखाने में शाहजहाँ तुझे बनायेंगे...
बोल ना सच क्यूँ बोलता है..
क्यूँ बहरों के कान खोलता है...
क्यूँ अंधों को सच दिखलाता है..
चुप नहीं हो सकता .......बोल
इसमें तेरा क्या जाता है...
इसमें भी घोटाला है..
इसमें भी घोटाला है ..
कहता है सबसे..
जिसको हमने सदियों टाला है....
इतिहास गवाह है...
सच्चाई हमेशा सूली चड़ा है ...
बोल क्यूँ जिद पर अड़ा है...
चुप ना हुआ तो ...
रोज झूठ का इंजेक्सन तुझे लगायेंगे..
झूठ तेरी रगों में बहायेंगे...
(रामेश्वरी)

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