हिदी की पढ़ाई,
परसों एक रिक्शा वाला आड़े टेढ़े चलता हुआ मेरी गाडी को हल्का सा छु गया , मैंने एक दम संज्ञान लिया, गाडी का शीशा नीचा किया , गर्दन बहार निकाली , आँखे तरेडी , और रिक्शा वाले की तरब मुखातिब हो कर कहा ... ओ बहन के… माँ के ... तेरि… और रिक्सा वाला फुर्र ...इधर एक विदेशी भी सब कुछ देख रहा ,था उसने अपने गाइड से माजरा पुछा ...तो गाइड ने उस विदेशी को कहा की फलां गाडी वाले ने रिक्शे वाले को हिंदी में कुछ समझाया है और वो समझ कर सीधा अपने रस्ते पर चले गया है , हिंदी भाषा के प्रयोग की ताकत और महत्ता का उस विदेसी को ज्ञान हुआ, ..उसने तुरंत मेरी तरफ बढ़ कर मुझे कुछ बात कहने के लिए ,रोक लिया। पूछने पर उसने बताया की वोह मुझसे हिंदी सीखना चाहता हैं ... मैंने उसे कुछ हिंदी के लेक्चर देने का वायदा किया। और वो अगले दिन घर पर ही आ धमका। मैंने उससे पुछा की हिंदी कौन सी सीखना चाहते हो वो समझा नहीं , तो मैंने खोल कर समझाया , देखो पुलिस में भर्ती होना है, या नेता बनना है, किसी की चमचा गिरी करनी है , या अपने पैसे का रॉब झाड़ना हैं, धोखा देना है या किसी साउथ इंडियन से हिंदी में बात करनी हैं, हिंदी अलग-२ प्रकार की हैं,देखो पुलिस वाले की हिंदी में माँ बहन शब्दों का प्रयोग ज्यादा होता हैं, जबकि नेता जी की हिंदी में भविष्य काल का ज्यादा उसे होता है, मसलन हम ये कर ,देंगे वो कर देंगे, पानी पूरा मिलेगा , राशन सस्ता हो जाएगा , नौकरी मिलेगी , नालियों की सफाई होगी ..सब के सब भविष्य काल में .. अगर चमचा गिरी करनी है तो उसमे जी हजूर , मालिक , यस सर , हाँ जी, बिलकूल ठीक सर, हाँ , हाँ ...और सिर्फ हाँ जैसे सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल ही होता है, ...किसी साउथ इंडियन के साथ कोई भी बात करनी हो तो जेंडर अर्थात पुरुष वाचक संबोधन को स्त्री वाचक में बदलना होगा , अर्थात सभी पुरुष यही कहेंगे , मई दूध खाती , मई चावल पीती .. इत्यादि -२। अब विदेशी का सर चकराया वो बोल हिंदी तो बड़ी व्यापक और भरपूर लोचदार भाषा है , लेकिन थोडा दिमाग चक्र खा रहा हैं, जरा थोडा मोर एक्सप्लेन प्लीज .. कहा चल कोई बात नहीं बेटा तुझे ढंग से ही समझाता हूँ। उससे पुछा देखो अगर आप किसी परिचित को देखते हो तो उसे क्या संबोधन करते हो , उसने कहा हाय , मैंने कहा हिंदी बड़ी व्यापक है , अगर आप अपने अध्यापक को देखोगे तो कहोगे नमस्कार सर, ताऊ राम -२ अगर ताऊ मिले तो, भाई मिले भैया जी राम राम, और भाई के धर्म पर भी निर्भर करता हैं की वो हिन्दू है या मुसलमान हैं, सिख है या इसाई है , इसके बाद अगर हिन्दू है तो कौन सा जैन, बोध , तो या तो असल्लम वालेकुम या फिर वाहे गुरु , इत्यादि -२ , इसके अलावा भी निर्भर करता ही की उसने किस गुरु का सत्संग ले रखा है ..जानने पर राधे राधे , या फिर जय गुरुदेव , या ॐ शांति कहना होगा इसके पेटेंट तो नहीं हुए है पर एक दुसरे गुरु ने इनको मान लिया है की अमुक तरह की राम -२ अमुक गुरु के चेले करते हैं मसलन ॐ शांति को ब्रह्मा कुमरिएस करती है , ..निर्भर ये भी करता ही की हाय लेनदार को की जा रही या देनदार को , ..मसलन जिसे लेना होगा वो बोलेगा राम-२ सेठ जी, और जिसने उधार दिया होगा वो कर्ज़दार को देखते ही बोलेगा अबे कहाँ था इतने दिन फ़ोन भी नहीं उठाता ...हाय चिचोरों द्वारा किसी हसीना को देखकर तो अंग्रेजी वाली हाय ही चलती है जो गहरी सांस खींच कर कही जाती हैं , इसे करने पर वैसे भी डिस्काउंट में चप्पल जूते एक्स्ट्रा मिलने का फायदा भी होगा। हाय रिक्शे वाले को तो मैंने की थी , अब रिक्शे वाला कैसे करता है ये खुद रिक्शा चला कर समझना पड़ता है, उस बेचारे कू हाई कहनी नहीं पड़ती उसकी तो हाय निकलती है, और ...और ....अब विदेसी बेहोश हो चूका था , तो लोगों ने कहा हाय बिचारे को क्या हुआ
Thanks,
Pahalwan ji
( Deepak A.P.)
परसों एक रिक्शा वाला आड़े टेढ़े चलता हुआ मेरी गाडी को हल्का सा छु गया , मैंने एक दम संज्ञान लिया, गाडी का शीशा नीचा किया , गर्दन बहार निकाली , आँखे तरेडी , और रिक्शा वाले की तरब मुखातिब हो कर कहा ... ओ बहन के… माँ के ... तेरि… और रिक्सा वाला फुर्र ...इधर एक विदेशी भी सब कुछ देख रहा ,था उसने अपने गाइड से माजरा पुछा ...तो गाइड ने उस विदेशी को कहा की फलां गाडी वाले ने रिक्शे वाले को हिंदी में कुछ समझाया है और वो समझ कर सीधा अपने रस्ते पर चले गया है , हिंदी भाषा के प्रयोग की ताकत और महत्ता का उस विदेसी को ज्ञान हुआ, ..उसने तुरंत मेरी तरफ बढ़ कर मुझे कुछ बात कहने के लिए ,रोक लिया। पूछने पर उसने बताया की वोह मुझसे हिंदी सीखना चाहता हैं ... मैंने उसे कुछ हिंदी के लेक्चर देने का वायदा किया। और वो अगले दिन घर पर ही आ धमका। मैंने उससे पुछा की हिंदी कौन सी सीखना चाहते हो वो समझा नहीं , तो मैंने खोल कर समझाया , देखो पुलिस में भर्ती होना है, या नेता बनना है, किसी की चमचा गिरी करनी है , या अपने पैसे का रॉब झाड़ना हैं, धोखा देना है या किसी साउथ इंडियन से हिंदी में बात करनी हैं, हिंदी अलग-२ प्रकार की हैं,देखो पुलिस वाले की हिंदी में माँ बहन शब्दों का प्रयोग ज्यादा होता हैं, जबकि नेता जी की हिंदी में भविष्य काल का ज्यादा उसे होता है, मसलन हम ये कर ,देंगे वो कर देंगे, पानी पूरा मिलेगा , राशन सस्ता हो जाएगा , नौकरी मिलेगी , नालियों की सफाई होगी ..सब के सब भविष्य काल में .. अगर चमचा गिरी करनी है तो उसमे जी हजूर , मालिक , यस सर , हाँ जी, बिलकूल ठीक सर, हाँ , हाँ ...और सिर्फ हाँ जैसे सकारात्मक शब्दों का इस्तेमाल ही होता है, ...किसी साउथ इंडियन के साथ कोई भी बात करनी हो तो जेंडर अर्थात पुरुष वाचक संबोधन को स्त्री वाचक में बदलना होगा , अर्थात सभी पुरुष यही कहेंगे , मई दूध खाती , मई चावल पीती .. इत्यादि -२। अब विदेशी का सर चकराया वो बोल हिंदी तो बड़ी व्यापक और भरपूर लोचदार भाषा है , लेकिन थोडा दिमाग चक्र खा रहा हैं, जरा थोडा मोर एक्सप्लेन प्लीज .. कहा चल कोई बात नहीं बेटा तुझे ढंग से ही समझाता हूँ। उससे पुछा देखो अगर आप किसी परिचित को देखते हो तो उसे क्या संबोधन करते हो , उसने कहा हाय , मैंने कहा हिंदी बड़ी व्यापक है , अगर आप अपने अध्यापक को देखोगे तो कहोगे नमस्कार सर, ताऊ राम -२ अगर ताऊ मिले तो, भाई मिले भैया जी राम राम, और भाई के धर्म पर भी निर्भर करता हैं की वो हिन्दू है या मुसलमान हैं, सिख है या इसाई है , इसके बाद अगर हिन्दू है तो कौन सा जैन, बोध , तो या तो असल्लम वालेकुम या फिर वाहे गुरु , इत्यादि -२ , इसके अलावा भी निर्भर करता ही की उसने किस गुरु का सत्संग ले रखा है ..जानने पर राधे राधे , या फिर जय गुरुदेव , या ॐ शांति कहना होगा इसके पेटेंट तो नहीं हुए है पर एक दुसरे गुरु ने इनको मान लिया है की अमुक तरह की राम -२ अमुक गुरु के चेले करते हैं मसलन ॐ शांति को ब्रह्मा कुमरिएस करती है , ..निर्भर ये भी करता ही की हाय लेनदार को की जा रही या देनदार को , ..मसलन जिसे लेना होगा वो बोलेगा राम-२ सेठ जी, और जिसने उधार दिया होगा वो कर्ज़दार को देखते ही बोलेगा अबे कहाँ था इतने दिन फ़ोन भी नहीं उठाता ...हाय चिचोरों द्वारा किसी हसीना को देखकर तो अंग्रेजी वाली हाय ही चलती है जो गहरी सांस खींच कर कही जाती हैं , इसे करने पर वैसे भी डिस्काउंट में चप्पल जूते एक्स्ट्रा मिलने का फायदा भी होगा। हाय रिक्शे वाले को तो मैंने की थी , अब रिक्शे वाला कैसे करता है ये खुद रिक्शा चला कर समझना पड़ता है, उस बेचारे कू हाई कहनी नहीं पड़ती उसकी तो हाय निकलती है, और ...और ....अब विदेसी बेहोश हो चूका था , तो लोगों ने कहा हाय बिचारे को क्या हुआ
Thanks,
Pahalwan ji
( Deepak A.P.)
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