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Monday, April 29, 2013

कहीं बजी घंटियाँ ..
कहीं राग छेड़ रहा संतूर है ...
हाय ये इश्क ..
ख़ुदा !  खुद में इक फ़ितूर है । 
जो कर बैठा ..
वो बाँवरा, खुद से मीलों दूर है । रामेश्वरी 

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