Search My Blog

Thursday, April 25, 2013

देवदासी





रह चरणों में देवता के ...
रही में प्रेम प्यासी ..
कभी महसूस करूँ बंधन ..
कभी घट घट वासी ..
कोई कहे जोगनी, कोई देवदासी ..

वही बसेरा मेरा ...
मंदिर शिवालों में ..
मदमस्त नृत्य करना चाहूँ ..
गोपियों ग्वालों में ..
पग बंधे घुँघरू मेरे ..
क़ैद रस्मों रिवाजों में ..
असंभव निकासी ..

अर्पित आजीवन ..
देव चरणों की दासी ..
ब्याहता देवों की ..
वर्जिता जीवन मेरा ..
देव स्पर्श को प्यासी ...रामेश्वरी "तस्वीर क्या बोले" समूह में समक्ष रखे गए चित्र पर मेरे कुछ शब्द ....शुभसंध्या सभी मित्रगणो को ..







No comments:

Post a Comment