वो धूप पर अपना हक ज़माता रहा...
जब चाहा हमने सुखाना नासूर अपना ..
धूप पर बादल सजाता रहा..
उसे कहाँ थी खबर, आंधी से वो टकराता रहा...
टकरा हम से वो धरती पर आंसू बहाता रहा....रामेश्वरी
जब चाहा हमने सुखाना नासूर अपना ..
धूप पर बादल सजाता रहा..
उसे कहाँ थी खबर, आंधी से वो टकराता रहा...
टकरा हम से वो धरती पर आंसू बहाता रहा....रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment