Search My Blog

Tuesday, September 11, 2012

क्यूँ खड़ी की इमारत इतनी ऊँची अपने हृदय तूने ..
ताउम्र बीत गयी मेरी, सीढियां लाँघ तुझ तक आने में  ...
मखौल उड़ाते हैं संगी साथी मेरे, बोले क्या किया तूने.?
कहते हैं इबादत को यही इमारत मिली तुझे ज़माने में ....
रामेश्वरी 

No comments:

Post a Comment