काश जो मैं रंगरेजन होती...
ये हथेलियाँ, दुःख भरे जीवन को...
रंगने में तेज न होती ?..
रंग पाती अंधेरों को ..
मद्धम पड़ चुके स्वप्नों को ..
वो इन्द्र धनुष जो जाता था ..
मेरे ह्रदय से तेरे ह्रदय तक..
फीका अब पड़ चुका ..
रंग भर पाती उस क्षितिज को ..
जो माध्यम था मिलन का हमारा...
ये हथेलियाँ, दुःख भरे जीवन को...
रंगने में तेज न होती ?..
रंग पाती अंधेरों को ..
मद्धम पड़ चुके स्वप्नों को ..
वो इन्द्र धनुष जो जाता था ..
मेरे ह्रदय से तेरे ह्रदय तक..
फीका अब पड़ चुका ..
रंग भर पाती उस क्षितिज को ..
जो माध्यम था मिलन का हमारा...
अब तो समग्र रंग एक हो ..
ह्रदय पर धूल कालिख भरी बन चुके हैं .....
काश उमंग का रंग भर पाती..
जो मैं रंग्रेजन बन पाती ........रामेश्वरी....
ह्रदय पर धूल कालिख भरी बन चुके हैं .....
काश उमंग का रंग भर पाती..
जो मैं रंग्रेजन बन पाती ........रामेश्वरी....
No comments:
Post a Comment