मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Thursday, September 27, 2012
जब मन करा मर मिटे हम ...
पतंगा बन नूर में तेरी आ बैठे ...
रात भर का साथ रहा हमारा ..
पहल पहर खुद को राख बना बैठे ....रामेश्वरी
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