जुगनू से ली रोशनी..
रजनी से गोपनीय अन्धकार ..
चंदा से रूप लिया ..
सूरज से आग ..
फूलों से खुशबू ली..
हवा से राग ..
दरिया से ली अल्हड़ता ..
चंदा से दाग ..
सागर से प्रीत ली...
हिम से ली शीतलता .
हिमालय से श्रृंगार ..
वर्षा से लिया संगीत..
बूंदों ने छेड़ा ज्यूँ राग ...
नृत्य दिया मोरनी ने..
कोयल गाये मेघ मल्हार ..
निहारे प्राणी सारे ..
यूँ रंगा प्रकृति ने धरा दरबार ....रामेश्वरी ..शु प्रभात सभी मित्रगनो को..
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