आज फिर सोचा..
खींच आकाश को..
धरती पर पटक दूं...
रख लाखों तारे वो..
अपनी मुस्कान में ..
जैसे हमें जलाता है वो ..
जलती उल्काएं फ़ेंक..
दीपावली मनाता है वो ...रामेश्वरी
खींच आकाश को..
धरती पर पटक दूं...
रख लाखों तारे वो..
अपनी मुस्कान में ..
जैसे हमें जलाता है वो ..
जलती उल्काएं फ़ेंक..
दीपावली मनाता है वो ...रामेश्वरी
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