जब भी आया, गिरा दिया पलकों से मुझे...
अब ना आऊँगा कभी, नैनो के दर पर तेरे...
तू बस खुश आबाद रहे, अपने सजन के डेरे ..
जलन बस अब सीने में, करीब जब साजन तेरे...
भीतर नैनो में छिपकर रहूँगा, सजन से तेरे ...
करूंगा नज़ारा तेरा, जब2 देखे तू आएना प्रिये मेरे...
काश वजूद होता गर मेरा, ले सकता मैं भी संग फेरे तेरे ..
सुख नमक बन जाऊंगा, जुदाई में मैं प्रियतमा देख तेरे ...
कह कर वो मोती सा बूँद, गिर गया धरा पे बिदाई में मेरे...रामेश्वरी

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