चलो अब मुझे थोड़ा सा सो लेने दो...
परेशान हूँ थोड़ा सा, अमन ओ चैन के बीज बो लेने दो...
शायद अंकुरित हो, पौध वृक्ष बन सके..
छाया देने धूप घनेरी वो तन सके....
शायद कोई पुरवाई यहाँ भी बह सके.............
परेशान हूँ थोड़ा सा, अमन ओ चैन के बीज बो लेने दो...
शायद अंकुरित हो, पौध वृक्ष बन सके..
छाया देने धूप घनेरी वो तन सके....
शायद कोई पुरवाई यहाँ भी बह सके.............
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