मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Sunday, June 10, 2012
होते गर हर ख्वाब हंसीं, यथार्थ में फिर जीता कौन...
दे सकता गर सच यकीन, सच रखता क्यूँ जिह्वा मौन.........
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