ना खींचो ये रेखा ..
क़दमों के आगे मेरे..
ना तुम लक्ष्मण हो ..
जिसकी खिंची रेखा से..
ये सीता रावन से बच पाएगी..
ना मैं सीता हूँ उस देव युग की..
क्या आज की सीता ..
रावन के धन वैभव से बच पाएगी...?
भ्रमित हो धन वैभव से..
वो खुद रावन संग घर बसाएगी..
राम वध करे तो करे कैसे..
आज के रावन प्राण अपने..
नाभि में कहाँ, स्विस बैंक में रखते हैं...
पार की थी कभी सागर पट्टिका एक..
अब सात समंदर जाना होगा..
स्विस बैंक से धन तो आ ना सका..
रावण के प्राण ....असंभव ....
खुद के प्राण को बचाना होगा...
(रामेश्वरी )..ram ek imaandar aur sachcha insaan
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