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Tuesday, June 5, 2012

मासूम...बचपन

हैरान सा था वो मासूम...
होश भी थे उसके बचपन में गुम..
वो जानता नहीं मौत क्या होती है...
वो तो अर्थी पड़ी देख...
मासूमियत से हँस रहा था...
बार बार प्रश्न यही कर रहा था...
माँ ये धरती पर सोये क्यूँ?
दुनिया सोने पर इनके रोये क्यूँ?
माँ मासूम का समझती भी क्या...
मासूम को मौत की परिभाषा करती कैसे बयाँ...
बस उसका जवाब यही था...
बेटा, ये गहरी नींद सोये हैं..
उठेंगे अब नहीं ...
इसीलिए सब रोये हैं...
झट मासूमियत से बोला वो बच्चा...
माँ स्कूल जाना नहीं लगता अच्छा..
मुझे भी सोना है हमेशा को..यही अच्छा .......बच्चों के भोले से सवाल और जवाब...जहाँ कुछ कहते नहीं बनता...रामेश्वरी 




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