मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Wednesday, October 12, 2011
हम आईना देखें क्यूँ ?
आईना भी झूठ कहता है...
जब भी देखूं आईना मैं ..
दिखे तस्वीर तेरी...
और आईना कहे इसमें खता..
मेरी नहीं जब...
तुझ में वही बस्ता है...
खुदा वो नहीं खुदा से कम भी नहीं
मेरे घर जब खुशियाँ वही रचता है ....रामेश्वरी
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