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Sunday, October 9, 2011

निंद्रा तू रात्रि के पहर आया न कर...
जिन्हें भूलना चाह हमने ... यूँ...!
उनसे हमें स्वप्न में मिलवाया न कर....

उनसे दूर जाने को, आँखों में तुझे यूँ आने न देंगे...
मेरा बसेरा बसा नहीं, तुझे कैसे यहाँ घर बसाने देंगे....(रामेश्वरी)

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