मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Wednesday, October 12, 2011
वक़्त तू हमसे यूँ बेहयाई ना कर..
ओड़ मुखौटा चांदनी का, आशियाना मेरा...
पल भर को दमकाया ना कर.....
सोच चाँद आ गया हम व्रत तोड़ देते हैं...
दे दगा हमें फिर यूँ अँधेरा ओड़ा ना कर.......रामेश्वरी
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