शायद आँखों को भी उसकी याद सताती है...
उसकी तस्वीर को वो भी बहाना चाहती है..
इसीलिए याद में वह भी अश्रू खूब बहाती है .. .
तस्वीर बसी आँखों की इतनी घहराई में...
जहाँ तक शायद कोई सीड़ी नहीं जाती है...
इसीलिए चाहकर भी अडिग नहीं कसम..
... फिर टूट जाती है...(रामेश्वरी)
उसकी तस्वीर को वो भी बहाना चाहती है..
इसीलिए याद में वह भी अश्रू खूब बहाती है .. .
तस्वीर बसी आँखों की इतनी घहराई में...
जहाँ तक शायद कोई सीड़ी नहीं जाती है...
इसीलिए चाहकर भी अडिग नहीं कसम..
... फिर टूट जाती है...(रामेश्वरी)
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