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Sunday, October 2, 2011


यूँ मेरे उजालों में अँधेरा ना भर ..
ख़वाब रात समझ दस्तक देते हैं !

यूँ इतना पाक -साफ़ दिल इंसान ना बन...
खुदा समझ हम नित नतमस्तक करते हैं  !

यूँ प्यार की घटा बन लहरा कर गली से हमारी ना गुजर...
हम सावन समझ पपीहा समान आसमाँ को यूँ तकते हैं !

(रामेश्वरी)

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