मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Tuesday, October 18, 2011
कहीं कोई भूख में खा रहा..
कहीं भूख किसी को खा रही..
उपजाया जिसने इस अन्न को..
अन्न तृष्णा उसी को तड़पा रही..(रामेश्वरी)
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