उजाड़ दी वो सीडियां जिनसे उतरे थे वो दिल ओ ज़मीन पर, नासूर देने के वास्ते ।
अब गर्द लिए हाथ फिरते हैं हम, सुना है नया मकां बना रहे हैं वो बसर के वास्ते ।। रामेश्वरी
अब गर्द लिए हाथ फिरते हैं हम, सुना है नया मकां बना रहे हैं वो बसर के वास्ते ।। रामेश्वरी
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