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Monday, October 29, 2012

तारें टूट चुकीं, पाप रूपी छिद्र भर चुके, धुन मधुर बजा रहे हैं साज़।।।
राम हैरान हैं, हाथ रंगे भ्राता लहू से जिनके, वही मुझे पूज रहे हैं आज ।।।
रावन मंद 2 मुस्काये देख, अरे रावन ही रावन को जला रहे हैं आज ।।।
सच देशद्रोही है, झूठ पहने हैं देखो शहंशाह का ताज ....रामेश्वरी

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