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Monday, October 15, 2012

क्या होगा इस देश का...


क्या होगा इस देश का...
भरोसा नहीं यहाँ  किसी भेष का ...

देशप्रेमी जहाँ देशद्रोही कहलाये जाएँ...
कालिख चेहरों पर हो जिनके...
श्वेत उनका भेष होगा...
सोच क्या उस  देश का होगा ?

चंद ईंटो के लिए भाई भाई में द्वेष होगा...
फर्क बस इतना होगा...
कुछ ईंटो में मंदिर लिखा होगा, कुछ में मस्जिद लिखा होगा..
बचा सिर्फ भट्टी में, खाक  ए इंसानियत शेष होगा......

सोयी है गहरी निन्द्रा प्रजा अभी..
नींद का थोड़ा समय अभी शेष होगा...
जाग जाओ मिटा दो तिमिर भीतर का ..
जनता का जल्द फिर क्रांति का उद्घोष होगा...

नवरात्र हैं...
अधर्म से फिर धर्म का कलेश होगा...
दस सर फेंको अपने धड से...
अहंकार मिटेगा,  जल कर भस्म होगा..
कुछ न फिर अवशेष होगा..


हर गली कूचे अब हिंसा बिखरी है...
एक भाई के हाथ तलवार, दूजे हाथ खुकरी है 
यकीं क्या होगा, आने वाली पीढ़ी को...
अहिंसा परम धर्म..
कभी इस देश का रहा सन्देश  होगा.....

रामेश्वरी .

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