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Thursday, May 9, 2013

जमुरियती सरकार



सुनो सुनो जमूरों !
ये जमुरियती सरकार है । 

मिटने वाले मिटे वतन पर । 
इन्हें गद्दियों से प्यार है । 
सुनो सुनो जमूरों !
ये जीव शाकाहार हैं । 
चारा निगलें क्षण भर में । 
कहाँ लेते डकार हैं । 
ये कुदरत का अनोखा आविष्कार है । 

सुनो सुनो !
महंगाई की डोर खींच।।
तमाशा हमारा देखते हैं ..
तपन से भूख की हमारी ..
अपनी राजनितिक रोटियाँ सेंकते हैं । 
ये सूरते निराकार हैं । 
जमूरों की भरमार है। 
ये ज़मुरियती सरकार है । 

ना अब हिंदी ना हिन्द की बातें हैं । 
फैला रहे, समाज में  मज़हबी बातें हैं । 
झूठ बोल रहा, सच को पड़ी लातें हैं । 
निगल रहे सभ्य समाज ये तो । 
ये तो दैत्याकार हैं । 
ये जमुरियती सरकार हैं ।  रामेश्वरी 

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