मन का हिलोर
आम शब्दों में, आम इंसान की, कुछ आम सी भावनाएं ।
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Tuesday, May 14, 2013
बेशकीमती हैं अश्क तेरे, मेरे जीने के लिए ।
सागर क्या ओहदा बड़ा पायेगा कभी, इन्हें पीने के लिए ॥ रामेश्वरी ..
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