प्रेम में प्रताड़ना ।
अब किसे भाती है ।
इतिहास में लैला ने पत्थर खाए ।
अब की लैला पिज़्ज़ा खाती है ।
अनारकली क़ैद रही दीवारों में ।
अब की अनारकली स्वछंद डिस्को जाती है ।।
पहले पाती लिखते थे, प्रेमी ।
लुकचुप दीवारों में ।
अब मोबाइल सिम हुए ।
जाने कहाँ वो प्रेम गया ।
जामे कहाँ वो दिन गए ।
भौतिकता के दौर में ।
स्वर्णिम दिन ग़ुम हुए ।
रामेश्वरी
अब किसे भाती है ।
इतिहास में लैला ने पत्थर खाए ।
अब की लैला पिज़्ज़ा खाती है ।
अनारकली क़ैद रही दीवारों में ।
अब की अनारकली स्वछंद डिस्को जाती है ।।
पहले पाती लिखते थे, प्रेमी ।
लुकचुप दीवारों में ।
अब मोबाइल सिम हुए ।
जाने कहाँ वो प्रेम गया ।
जामे कहाँ वो दिन गए ।
भौतिकता के दौर में ।
स्वर्णिम दिन ग़ुम हुए ।
रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment