हाय रे आधुनिकता ।
तू इतनी गहरी जड़े जमा गयी ।
संबंध बस नाम के रहे ।
प्रेम तो भौतिकता के दलदल में समां गयी ।
सभी पर ज्वर दिखावे का चढ़ा ।
श्रेय पाने को महंगाई भी पंक्ति में खड़ा ।।। रामेश्वरी
तू इतनी गहरी जड़े जमा गयी ।
संबंध बस नाम के रहे ।
प्रेम तो भौतिकता के दलदल में समां गयी ।
सभी पर ज्वर दिखावे का चढ़ा ।
श्रेय पाने को महंगाई भी पंक्ति में खड़ा ।।। रामेश्वरी
No comments:
Post a Comment