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Friday, September 30, 2011

तू ना रहम कर, ना दवा कर...
बस मेरे जख्मो को हरा ना कर...

ये दौर है घौटालों का...
तू मेरे बे.ईमान होने पर शक ना कर ..

तू मांग जो मांगता है ...
मेरे भगवान होने पर सवालिया निशाँ ना कर...

रोता दिल, नम होती आँखें मेरी भी हैं...
तू मेरे इंसान होने पर सवाल ना कर...

कभी इस डाल कभी उस डाल ...
कूद सकता हूँ मैं....
तू डाल डाल पात पात हो सकता हूँ मैं.
बस मेरे नेता होने पर बवाल ना कर.....
(रामेश्वरी)

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