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Friday, September 23, 2011

बहती ठंडी ठंडी पुरवाई शायद पैगाम ये दे रही ..
धरती सावन से उब अब ठंडी रजाई ओड़ रही ..
धूप मद्धम मद्धम है...मौसम खिला खिला ....
आने वाला अब फूलों का मौसम है पीला पीला ..
सरसों फूलेगी फूलेंगे गेंदे के फूल...
गन्ना खड़ा होगा खेतो में अब ..
कहे जैसे इंसान चूस सके मुझे तो चूस
मूंगफली गरम गरम सौंधी खुशबू देगी ...
फूलेंगे मक्का के फुलले .......
धूप सकेंगे सब छत की मुंडेर पर बैठे ...
सखियाँ बतियाएंगी ....
गर्मी की सुस्ती दूर जायेगी और...
ठंडी हवा सताएगी ...
खेतो में फूटती कपास और ...
आती हलकी धूप शायद पैगाम यही दे रही....(.रामेश्वरी)

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