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Tuesday, September 6, 2011

जिस माँ को नसीब ना थी..
पार करे घर की चौखट..
आज मर कर उस माँ की..
तस्वीर उस चौखट के पार है..
जीते जी मिला ना माँ का ..
सम्मान जिससे..
आज तस्वीर पर टंगा इक...
दिखावे का हार है..
यदि यही माँ के प्यार का ..
अंजाम है..ईश्वर..
मोहे अगले जन्म माँ ही .
ना कीजियो...........
माँ किसी भी रूप में हो आज...
देश या इन्शान
सभी का यही हाल है.
माँ प्यार की दौलत लुटा ..
संतान पर कंगाल की कंगाल है..
देख मुझे माँ की तस्वीर..
रोना भी आया..
हंस पड़ी मन भीतर ही भीतर .
देख उस औलाद को...
क्या भरा उसके अन्दर दिखावे
का मान है...(रामेश्वरी)

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