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Friday, September 23, 2011

बचपन याद आता है....
सुकून भरा..निर्भय बचपन याद आता है...

वो गीटे, वो सांप सीडी का खेल..
वो इक दुसरे के पीछे बनाते हम रेल..
बिना जाति-पाती के हम बच्चों का मेल..

वो इक दुसरे का दुःख चुटकी में भाम्पना..
वो छत पर हमारा सबका रस्सी टापना..
वो मम्मी की डांट पर हमारा कांपना...
सच बचपन याद आता है..............

वो पल भर में कुट्टी होना..
पल भर में अब्बा होना...
ना कोई मार पिट ना रोना धोना ...
सबके हाथों में सस्ता सा खिलौना ..
सच बचपन याद आता है...

वो तख्ती पर लिखना...
गाची से लीपना...
तख्ती तख्ती सुख जा...शोर मचाना ..
सच बचपन बहुत याद आता है...

हम हिन्दू हैं या मुस्लिम....का अज्ञान
बचपन और प्रेम ही उस वक़्त अपना ज्ञान ...
पड़ोसियों का भी आदर सम्मान .....
सच बचपन बहुत याद आता है ....

इक गलती पर किसी का मार खाना..
हम सभी का खिलखिला कर हँसना ...
कभी आमिर खान की फिल्म देखने जाना..
देखने पर मार खाना ....
सच बचपन बहुत याद आता है...

कभी क्लास में टीचर्स की ड्रेस पर जयादा धयान ...
कभी उसका बालों का फूल देखना...
कभी उसकी सेंडल पर मन का आ जाना....
देख उनकी शान हम भी कभी बड़े होंगे..
जागना यह अरमान...
सच बचपन बहुत याद आता है....(रामेश्वरी)

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