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Sunday, September 4, 2011


आज मर कर भी देखा 
शांति वहां  भी कहाँ थी ..
हाय अब क्या होगा..
हाय कैसे होगा..
हाय मेरे बच्चे कौन पालेगा ..
हाय कितना अच्छा आदमी था .
हाय अब मेरा ख्याल कौन रखेगा..
हाय हाय से ख्याल ये आया..
मेरा क्या होगा ख्याल किसे था ..
जीते जी पीटा,  मर कर भी पीट रहा.. 
जब सीने में मार मार मेरे  कोई रो रहा ..
हाय काश में मारा ही न होता...
सोचा था मर कर तो शांति मिलेगी..
पर शांति देवी ने ही सबसे अधिक ..
शोर कर रखा था.....

कभी सोचा अर्थी से खड़े हो इन्हें समझाता...
थोड़ी देर और चुप हो जाते तुम्हारा क्या जाता..
कुछ देर में बस, मैं शांति से मिटटी में विलीन हो जाता..

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