जब तू ना था ज़िन्दगी उधार सी थी
नदी की जैसे चुपचाप बह रही धार सी थी ..
जब तू न था .........................
जब तू ना था ज़िन्दगी वन में खिला इक फूल थी
ह्रदय में चुभन देने वाली दिन रैन वो शूल सी थी ..
जब तू ना था ............................
जब तू ना था ज़िन्दगी ज़िन्दगी ही ना थी........
ज़िन्दगी को जीने की तमन्ना ही कहाँ थी.......
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