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Friday, May 13, 2011

ख़ुशी मेरी  मज़ार  पर  रोई  न  होती . .
दुःख  य़ू  खिलखिला  कर  हंसा  न  होता

 
गर...................)))))))))))))))))))

एक  रुपैया  इमानदारी  से कमाया होता.
आज मैं अपनों से यूँ तो पराया न होता ..

इतनी गहरी नीद सोया क्यूँ.
आज इस कब्र मैं तनहा लेटा न होता.

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