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Tuesday, May 24, 2011

आज  फिर  से  स्त्रियों  से  सूरज  ने  मुख  फेरा  है ...
जब  सूरज को  बदली , प्रकृति , हवा  ने  घेरा  है ...

नाराज  न  हो  सूर्य  देव  कल  आपकी  बारी  होगी ..
सुबह 2 जब  फिर  आपकी  पूजा  की  तैयारी  होगी ..


कल पहले पहर इन सहेलियों में फूट पड जायेगी ..
सभी  फिर से अपनी 2 राह मुख फेर चली जायेंगी ..

प्रकाश तुम्हारा उदीयमान  होगा. 
जगमगाता फिर यह जहाँ होगा .

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