आज फिर से स्त्रियों से सूरज ने मुख फेरा है ...
जब सूरज को बदली , प्रकृति , हवा ने घेरा है ...
नाराज न हो सूर्य देव कल आपकी बारी होगी ..
सुबह 2 जब फिर आपकी पूजा की तैयारी होगी ..
जब सूरज को बदली , प्रकृति , हवा ने घेरा है ...
नाराज न हो सूर्य देव कल आपकी बारी होगी ..
सुबह 2 जब फिर आपकी पूजा की तैयारी होगी ..
कल पहले पहर इन सहेलियों में फूट पड जायेगी ..
सभी फिर से अपनी 2 राह मुख फेर चली जायेंगी ..
प्रकाश तुम्हारा उदीयमान होगा.
जगमगाता फिर यह जहाँ होगा .
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