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Friday, May 13, 2011

सावन जल्द ही आएगा

सूर्य  देवता पूरे  जोश  से  उदीयमान  है
धरती  का  भी  अब  बड़ा  तापमान  है 

हमारी  स्तिथि  अब   पपीहे  समान है 
आसमान  को  देख देख बचे  प्राण  है 
बच्चे  और  बुडे सब यहाँ  परेशान है


इस  सुखी धरती पर कब काली बदली छाएगी 
कब बरखा की बूंदे धरती के कलेजे में समाएगी 

छम छम मोर नाचेंगे कब
कोयल गुनगुनायेगी..
पपीहा प्यास बुझाएगा .कब
बगुला  तपस्या पर जाएगा.
बरखा में भीगेंगे सब 
गर्मी दूर भगाएगा 

जयेस्था महीना बहुत सताएगा 
पर वो सावन जल्द ही आएगा.
पर वो सावन जल्द ही आएगा







1 comment:

  1. अच्छी कविता है. एक दो छोटी मोटी त्रुटियां रह गई हैं. जैसे स्थिति -स्तिथि,बूढे़ - बुडे़, ज्येस्ठ - जयेस्था, जेठ भी चलता. सूखी धरती का तो सुखी धरती बन गया, यह सब transliteration की वजह से होता है पब्लिश करने से पहले एक बार देख कर सही कर लेना चहिए.

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