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Friday, May 13, 2011

apna

कभी अपनों के चेहरों में अनजान शख्स झलकता  है 
कहीं सब बेगानों में अपनापन झलकता है ये खुदा.


किसे कहे अपना और किसे हम माने यहाँ बेगाने हैं
दो बोली का फासला है जो बोल दें उन्हें ही जाने हैं


सही और गलत का फरक दें हमें ऐ खुदा
यही दुआ है अपना न कोई था न हुआ है ..

स्वार्थ से परे कोई दुनिया बना  तेरे हाथ में सब है खुदा
जहाँ माँ बेटा, भाई और भाई न हो स्वार्थ में कभी जुदा 

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