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Saturday, October 12, 2013

रावण क्यूँ परेशान ?




रावण क्यूँ परेशान ?

हैरान है रावण . 
दुनिया की कार्यवाही से। .  
खुद कलयुगी रावण। . 
फूँक रहे.  .
मुझे! 
कितनी वाह वाही से। . 

तुलना करूँ,  कभी जो.. 
कृत्यों की.. 
न्याय चाहूँ मैं ?
दुशासन स्वछंद फिरे . . . 
क्यूँ युगों अग्नि समाऊँ मैं ?
अब शायद प्रकृति भी। . 
गवाह रहेगी मेरी 
अब ना अग्नि समाऊँ मैं ?
सम्मान दिया राम ने। . 
तुमसे मुखाग्नि ना चाहूँ मैं ?

स्तब्ध हूँ। . 
न्यायिक कार्यवाई से ॥ रामेश्वरी। 


(संस्मरण )


बचपन मैं जो उत्साह रामलीला देखने को हमारी दिलों में होता था वो शायद अब की पीढ़ी के बच्चों में नहीं दिखाई देता ।   मुझे आज भी अपने मोहल्ले की रामलीला के सभी लोग अच्छे से याद हैं जो भिन्न भिन्न पात्र निभाया करते थे ।   एक दो बार मैंने खुद भी रामलीला  की शुभारंभ आरतीयों में हिस्सा लिया था ।   हमारे मोहल्ले में  रावण का पात्र निभाने वाले युवक जो की मेरे बड़े भाई के मित्र भी थे, मोहल्ले में बहुत लोकप्रिय थे ।  जब भी वह गली मोहल्ले से गुजरते,  हम सभी बच्चे यकायक ख़ुशी से कह उठते" देखो रावन जा रहा है " ।   उस दौर में वह हमारे लिए जैसे एक बड़ी फ़िल्मी हस्ती जैसे थे ।   वह बहुत ही सभ्य इंसान थे ।   

बात उन दिनों की है जब कंप्यूटर युग शुरू ही हुआ था और सभी टाइपिंग सीखा करते थे ।   हमारी क्लास में एक युवक था, जो की बहुत ही हसमुख और शरारती था ।   लड़कियों से फ़्लर्ट करना जैसे उसकी आदत थी ।  मैं सांवली रंगत की थी सो मेरे से उसका व्यवहार सिर्फ दोस्त वाला था ।  एक दिन अचानक सुबह सुबह दरवाजे की घंटी बजी और संयोगवश दरवाजा खोलना भी मुझे ही पड़ा ।   सामने जिस शख्स को देखा तो हैरान ।   वहां कोई और नहीं वही युवक था जो मेरे साथ टाइपिंग सीखा करता था ।   मुझे देखते ही वो  बिल्डिंग से नीचे उतर गया ।  संयोग वह मेरे बडे भाई साहब से रामलीला के बारे में जानकारी हेतु आया था ।   मैंने अपने भाई साहब से पुछा तो उनसे मालूम हुआ की यह वही युवक था जो राम का पात्र निभाता आया है ।   मैं उस युवक को राम के पात्र में कभी पहचान नहीं पायी,  क्यूंकि उस समय वह भारी भरकम मेक-उप में हुआ करता था ।   आज भी मैं इस बात पर हँस देती हूँ कि  यह भी अजब संयोग रहा की राम जैसा सभ्य इंसान रावण पात्र निभाता आया था ।   और कुछ कुछ रावण जैसा युवक राम का पात्र निभाता आया था ।   वो भी सिर्फ चेहरे मोहरे के कारण ।    क्या चेहरा इतना मायेने रखता है ?   रामेश्वरी 

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - रविवार - 13/10/2013 को किसानी को बलिदान करने की एक शासकीय साजिश.... - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः34 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  2. बहुत सुन्दर .
    नई पोस्ट : रावण जलता नहीं
    नई पोस्ट : प्रिय प्रवासी बिसरा गया
    विजयादशमी की शुभकामनाएँ .

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