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Thursday, October 17, 2013

यूँ तो हर फूल खुशबू ही समेटे है । 
पर कुछ फूलों ने जैसे यादें समेट लीं ॥ 

यूँ तो कुछ पर्वत भीतर आग समेटे हैं । 
पर कुछ पर्वतों ने शीतल स्वेत चादर लपेट लीं । 

कुछ अज्ञानियों ने,  पढ़ा कुछ नहीं,  पोथी रटें हैं ।
"कबीर" ज्ञानी पंडित भया वही, जोउन ढाई आखर रट लीं ।  रामेश्वरी 

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