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Tuesday, October 15, 2013

भागीरथ बना, बैठा है कौन ?




लहराती,
इठलाती,
धरा सहलाती,
मधुर गान गुनगुनाती,
मैं सुघोषा,
फिर !
दे रहा कौन,
आज ये मौन ?

ढोती पापी,
धोये पाप । 
आज यही संताप 
सदियों रही वही मैं । 
स्वयंभू भागीरथ बना,
बैठा है कौन ?  रामेश्वरी 

(गंगा माँ का इतना रौद्र रूप देखने के बाद भी क्या उत्तराखंड की सरकार ने कुछ भी सबक नहीं लिया ।  इतनी भारी मात्रा मैं जान माल की हानि हुई,  फिर भी इन सब के बावजूद हर की पौड़ी तक जल स्तर बहुत कम कर दिया गया है ॥  अगले वर्ष कहीं माँ का रौद्र रूप इससे भयावह ना हो ?  प्रकृति से छेड़छाड़ बुरी है क्यूँ अहंकार पाल रहा है इंसान ।)रामेश्वरी 

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