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Thursday, October 10, 2013

ना मस्जिद गिरी 
ना मंदिर गिरा
गिरा तो बस इंसान
जानवर की नज़र से गिरा। ।



पिछले वर्ष मैं सपरिवार चिड़ियाघर की सैर को गयी थी । वहां भिन्न भिन्न जंतुओं को देख मन बहुत प्रसन्न सा था । पर उनकी क़ैद भरी ज़िन्दगी मन को चुभ रही थी । आप शायद हँसेंगे पर उनकी जगह खुद को खूंटी से बंधा महसूस करने पर उनकी पीड़ा का सही सही आंकलन हुआ ॥ वहीँ करीब में, एक बाडे में एक गोरिल्ला भी बैठा हुआ था जो की बच्चों के लिए मुख्य आकर्षण था । बच्चों का शोर, युवाओं की सीटियों की आवाजें, लोगो का उसे पुकारना जैसे उसे रास नहीं आ रहा था । वह सभी की ओर पीठ किये बैठा रहा । मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे वो नाराज़ सा था, इंसानों की इस हरकत से कि उन्होंने उसकी आजादी छीन ली । हमने इतनी भाग दौड़ कर क्या पा लिया जो जानवरों के पास नहीं । जानवर हमसे कहीं बेहतर हैं । रामेश्वरी।।।

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