ख़त के पन्नों में, दफ़न फूल, दिखेगा तुम्हें ...
छिपी महक मेरी, बस इत्र समझ तुम लगा लेना ....
जिनमे जिक्र नहीं तेरा, शब्द वो दिखेंगे तुम्हें ..
मेरे मूक गुमशुदा शब्दों की तुम आवाज़ सुन लेना ....
छिपी महक मेरी, बस इत्र समझ तुम लगा लेना ....
जिनमे जिक्र नहीं तेरा, शब्द वो दिखेंगे तुम्हें ..
मेरे मूक गुमशुदा शब्दों की तुम आवाज़ सुन लेना ....
लफ़्ज़ों की माला पिरो लाया हूँ मैं, ब्याहने तुम्हें ..
हो जब फेरे अग्नि के, प्रेम अग्नि तुम जला लेना ...रामेश्वरी

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