रातरानी हूँ,
महकती, तेरी क्यारी हूँ ..
पहली पहर वजूद मेरा ..
इंतज़ार दोपहर तेरा ...
मिलन हो कैसे ?
लताबद्ध हूँ,
कोमल देह ..
पाने झलक तेरी ..
लाख जतन कर ..
तेरे झरोखे चढ़ी हूँ ..
महकता मदिरालय मेरा ..
निन्द्रा नशा तेरा ..
अब तुझे जगाऊँ कैसे ?
रामेश्वरी
बहुत सुन्दर लेख
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