फेस बुक पे आजकल कुछ हिन्दू मुस्लिम ज्यादा हो रहा है, सभ्यता गुम होती जान पड़ती हैं
इस पर मैंने कुछ लिखा हैं,…. ठीक लगे तो बताना
अब कुछ असाधारण करने की जरूरत नहीं ,
इतना बहुत है कहदो दिल में नफरत नहीं
मेरे हिन्दुस्तान के , मेरे वतन के मेरे अजीजों,
खुद के कहर से ये देश न ख़त्म हो जाए कहीं
जो नफ़रत का पाठ पढाये वो धर्म नहीं हैं,
क्या नुक्सान है जिस किताब में वो पाठ नहीं है
जन्मे है , पले है , पढ़े हैं बढे हैं इसी धरती पे
क्या मै और तुम इस मिटटी के कर्जदार नहीं हैं ,
एक मुसलमान गर गीता को इज्ज़त बक्शे ,
और हिन्दू कुरान की आयतों को समझे ,
मै सही औत तू गलत पे हो जाएँ कत्ले -आम
मेरे मुल्क इतना भी तंगदिल नहीं हैं.
जो रखते है कुछ मौलवी और संतो की फ़िक्र
उनके जेहन में सिवा सियासत के कुछ नहीं है ,
मेरी बेटी की शादी में एक मुसल्मान था हलवाई,
मैंने हर रोज नमाज एक ब्राह्मण की छत पे पढ़ी हैं
Thanks,
Pahalwan ji
( Deepak A.P.)
इस पर मैंने कुछ लिखा हैं,…. ठीक लगे तो बताना
अब कुछ असाधारण करने की जरूरत नहीं ,
इतना बहुत है कहदो दिल में नफरत नहीं
मेरे हिन्दुस्तान के , मेरे वतन के मेरे अजीजों,
खुद के कहर से ये देश न ख़त्म हो जाए कहीं
जो नफ़रत का पाठ पढाये वो धर्म नहीं हैं,
क्या नुक्सान है जिस किताब में वो पाठ नहीं है
जन्मे है , पले है , पढ़े हैं बढे हैं इसी धरती पे
क्या मै और तुम इस मिटटी के कर्जदार नहीं हैं ,
एक मुसलमान गर गीता को इज्ज़त बक्शे ,
और हिन्दू कुरान की आयतों को समझे ,
मै सही औत तू गलत पे हो जाएँ कत्ले -आम
मेरे मुल्क इतना भी तंगदिल नहीं हैं.
जो रखते है कुछ मौलवी और संतो की फ़िक्र
उनके जेहन में सिवा सियासत के कुछ नहीं है ,
मेरी बेटी की शादी में एक मुसल्मान था हलवाई,
मैंने हर रोज नमाज एक ब्राह्मण की छत पे पढ़ी हैं
Thanks,
Pahalwan ji
( Deepak A.P.)
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