लोग साँसों को जगा कर जीते हैं
हम साँसों को दबा कर जी गए ...
आज सिर्फ तन जा रहा कफ़न ओढ़ कर ..
हम तो माँ बनते ही खुद को पी गए .......रामेश्वरी
लोग साँसों को जगा कर जीते हैं
हम साँसों को दबा कर जी गए ...
धुंआ लहरा कर पीता हर शख्श ...
हम कमबख्त धुंआ दबा कर पी गए ....रामेश्वरी
हम साँसों को दबा कर जी गए ...
आज सिर्फ तन जा रहा कफ़न ओढ़ कर ..
हम तो माँ बनते ही खुद को पी गए .......रामेश्वरी
लोग साँसों को जगा कर जीते हैं
हम साँसों को दबा कर जी गए ...
धुंआ लहरा कर पीता हर शख्श ...
हम कमबख्त धुंआ दबा कर पी गए ....रामेश्वरी
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