मेरे एक मूर्ख मित्र ने पुछा ,
यार इन बड़ी-2 , गाड़ियों ,में कौन बैठा होता हैं,
कौन रहता हैं इन बड़े -2 आलिशान बंगलों में ..
कौन करता हैं खरीददारी इन बड़े- 2 माल्स में
कौन खता हैं मैकडी , और kfc के बरगर या चिकन
कौन नाचता है रात भर इन पञ्च सितारा होटल -क्लबों में ?
मैंने कहा धत्त
इतना भी नहीं पता ?
इनमे एक रहता है नेता जिसे दिन रात गरीबों की चिंता रहती हैं ,
यार इन बड़ी-2 , गाड़ियों ,में कौन बैठा होता हैं,
कौन रहता हैं इन बड़े -2 आलिशान बंगलों में ..
कौन करता हैं खरीददारी इन बड़े- 2 माल्स में
कौन खता हैं मैकडी , और kfc के बरगर या चिकन
कौन नाचता है रात भर इन पञ्च सितारा होटल -क्लबों में ?
मैंने कहा धत्त
इतना भी नहीं पता ?
इनमे एक रहता है नेता जिसे दिन रात गरीबों की चिंता रहती हैं ,
एक रहता हैं सरकारी खजाने का मालिक जो नेता को जनहित में पैसा खर्च करने के लिए देता हैं,
एक रहता हैं ठेकदार ,और एक इंजिनियर जो ठेके पास करता है गरीबों के कल्याण के लिए
देश की तरक्की के लिए
एक रहता हैं जो बिल पास करता है ये कह कर की काम हो गया है ,
गरीब खुश हो गए हैं और मैंने खर्चे का हिसाब ले लिया हैं,
वहीँ बगल में गरीबो के लिए जन कल्याण की सोसाईटी चलाने वाला रहता हैं
वहीँ रहता है वो पुलिस वालों का अफसर जिसे डंडे चलने होते हैं
निरीह जनता पर जो पूछती हैं की हमारा हक़ कहाँ गया ?
वहीँ एक उनका वकील भी हैं ..उसका काम है न्याय मांगले वालों को जवाब देना
वहीँ कहीं उनके गुरु खलीफाओं की मजारें भी हैं,
जिन पर वो गाहे बगाहे मालाएं चढ़कर प्रेरणा लेते हैं ..
वहीँ बगल में रहता हैं उनका विपक्षी जो बार -2 चिल्लाता हैं
अभी गरीबी टूर नहीं हुई , घोटाला हुआ हैं, सर्कार गिराओ , इस्तीफा दो !
अपनी बड़े-2 बंगलों से निकल अपनी बड़ी -2 कारों में शान से बैठे
ये घृणा की दृष्टि से देखते हैं हम गरीबों को
और ये भी पूछते हैं की ये कौन सड़कों पर कीड़ों के तरह रेंग कर चलते ,
गंदे नाले के पास टाट के झोपड़ों में, दिन बिताते
पेट पीठ एक किये हुए ?
और फिर उनके होठों पर एक मंद हंसी आती हैं ..
अभी बहुत कुछ करना हैं गरीबों के लिए ..!
एक रहता हैं ठेकदार ,और एक इंजिनियर जो ठेके पास करता है गरीबों के कल्याण के लिए
देश की तरक्की के लिए
एक रहता हैं जो बिल पास करता है ये कह कर की काम हो गया है ,
गरीब खुश हो गए हैं और मैंने खर्चे का हिसाब ले लिया हैं,
वहीँ बगल में गरीबो के लिए जन कल्याण की सोसाईटी चलाने वाला रहता हैं
वहीँ रहता है वो पुलिस वालों का अफसर जिसे डंडे चलने होते हैं
निरीह जनता पर जो पूछती हैं की हमारा हक़ कहाँ गया ?
वहीँ एक उनका वकील भी हैं ..उसका काम है न्याय मांगले वालों को जवाब देना
वहीँ कहीं उनके गुरु खलीफाओं की मजारें भी हैं,
जिन पर वो गाहे बगाहे मालाएं चढ़कर प्रेरणा लेते हैं ..
वहीँ बगल में रहता हैं उनका विपक्षी जो बार -2 चिल्लाता हैं
अभी गरीबी टूर नहीं हुई , घोटाला हुआ हैं, सर्कार गिराओ , इस्तीफा दो !
अपनी बड़े-2 बंगलों से निकल अपनी बड़ी -2 कारों में शान से बैठे
ये घृणा की दृष्टि से देखते हैं हम गरीबों को
और ये भी पूछते हैं की ये कौन सड़कों पर कीड़ों के तरह रेंग कर चलते ,
गंदे नाले के पास टाट के झोपड़ों में, दिन बिताते
पेट पीठ एक किये हुए ?
और फिर उनके होठों पर एक मंद हंसी आती हैं ..
अभी बहुत कुछ करना हैं गरीबों के लिए ..!
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