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Sunday, August 19, 2012


क्या मिला उनको दोनों आँखें बंद करके ...
खवाबों में आ न सके, यूँ  मजबूर होके..
सिमटे रहे पलकों में, सुबह का इंतज़ार करके.....रामेश्वरी 

1 comment:

  1. वाह सिमटे रहे पलकों में ......बहुत खूब

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