Search My Blog

Wednesday, August 24, 2011

दिखा कर आएना मुझे ..
वो खुद साया बन गए..

क्या जाना था मैंने कभी ...
आएना सच दिखलाता है ..

साया पकड़ न सका कोई ..
न सच दिखलाता है.. 
एक धुंधला सा साया है..
जो न आया कभी हाथ  है 
(रामेश्वरी)

No comments:

Post a Comment