नौ महीने पेट मैं रख,
सुख चैन खोती है माँ,
ला दुनिया मैं हमें,
लहूलुहान होती है माँ,
हमें सूखे मैं सुला,
खुद गीले मैं सोती है माँ,
गंद हमारा तुम्हारा,
सब कुछ धोती है माँ,
हमको हँसता देख हँसे,
रोते देख रोती है माँ,
उदर हमारा भर कर,
आधे पेट सोती है माँ,
हर तकलीफ मैं ढाल
वो हमारी बनती है माँ
जब सहारा चाहिए,
पथहर क्यूँ ढोती है माँ,
इतना सब देकर हमें,
इस उम्र मैं क्यूँ रोती है माँ ,
क्यूँ क्यूँ ?
(rameshwari nautiyal bahukhandi)
सुख चैन खोती है माँ,
ला दुनिया मैं हमें,
लहूलुहान होती है माँ,
हमें सूखे मैं सुला,
खुद गीले मैं सोती है माँ,
गंद हमारा तुम्हारा,
सब कुछ धोती है माँ,
हमको हँसता देख हँसे,
रोते देख रोती है माँ,
उदर हमारा भर कर,
आधे पेट सोती है माँ,
हर तकलीफ मैं ढाल
वो हमारी बनती है माँ
जब सहारा चाहिए,
पथहर क्यूँ ढोती है माँ,
इतना सब देकर हमें,
इस उम्र मैं क्यूँ रोती है माँ ,
क्यूँ क्यूँ ?
(rameshwari nautiyal bahukhandi)
sorry ma'am we r not able to read it
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