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Monday, April 4, 2011

maa ki aah

नौ महीने पेट मैं रख,
सुख चैन खोती है माँ,

ला दुनिया मैं हमें,
लहूलुहान होती है माँ,

हमें सूखे मैं सुला,
खुद गीले मैं सोती है माँ,

गंद हमारा तुम्हारा,
सब कुछ धोती है माँ,

हमको हँसता देख हँसे,
रोते देख रोती है माँ,

उदर हमारा भर कर,
आधे पेट सोती है माँ,

हर तकलीफ मैं ढाल
वो हमारी बनती है माँ

जब सहारा चाहिए,
पथहर क्यूँ ढोती है माँ,

इतना सब देकर हमें,
इस उम्र मैं क्यूँ रोती है माँ ,

क्यूँ क्यूँ ?
(rameshwari nautiyal bahukhandi)

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